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सामान्यस नियम एवं शर्तो

आमुख
टेलीग्राम –कोकिंगकोल :धनबाद
पीन-826005 – झारखंड
टेली. (0091) (0326) 2264307
फैक्‍स – (0091) (0326) 2267600

निविदा दस्‍तावेज सं.___________________________ आवेदन पत्र शुल्‍क  रु.
निविदा सं. – बीसीसीएल/पीयूआर/
क) निविदा प्राप्‍त करने की अंतिम तिथि एवं समय ____________________ 1.00 बजे अपराह्न तक
ख) निविदा खुलने की तिथि एवं समय  ________________________ 3.00 बजे अपराह्न तक
ग) ________________________ को 1.00 बजे अपराह्न के बाद प्राप्‍त होने वाली किसी भी निविदा को खोले जाने पर विचार नहीं किया जाएगा। डाक संबंधी किसी भी विलंब के लिए बीसीसीएल जिम्‍मेवार नहीं होगा।
घ) निविदा खुलने का स्‍थान:एम एम डिविजन, कोयला भवन , धनबाद।
विनिर्देशन की सूची एवं महत्‍वपूर्ण नियम एवं शर्तें
विषय:___________________ ________________________ ________________ _____________________ __________________________ की आपूर्ति का निवेदित भाव
वास्‍तविक निर्माताओं अथवा उनके डिलरों, विशेषकर निर्माताओं द्वारा उनकी ओर से बोली लगाने के लिए अधिकृत डिलरों से बीसीसीएल के भंडारों में माल आपूर्ति करने के लिए दो प्रतियों में मुहरबंद निविदा आमंत्रित की जाती है।  निविदा संलग्‍न सामान्‍य नियम एवं शर्तों से तबतक नियंत्रित  होगी, जबतक विशेष नियम एवं शतों में इसे विशेष रूप से उल्‍लेखित न किया गया हो।
1. निविदादाताओं को आवेदन-पत्र के शुल्‍क के लिए किसी राष्‍ट्रीयकृत बैंक द्वारा जारी उपरोक्‍त राशि का मांग-पत्र (बैंक ड्राफ्ट) अपने निविदा के साथ संलग्‍न करना है, जो ‘भारत कोकिंग कोल लिमिटेड’ के पक्ष में धनबाद में भुगतेय हो।
2. निविदाओं को पूरी तरह से इस निविदा दस्‍तावेजों में बताए गए तकनीकी विनिर्देशन, सामान्‍य नियम एवं शर्तों के अनुसार तैयार किया जाना है।
3. निविदादाताओं को कठोरता से निम्‍नलिखित निर्देशों का अनुपालन करना होगा:
3.1 निविदादाताओं को अपनी बोली एक बंद लिफाफे में, जिसमें दो अलग-अलग एलएसी/पीवीसी बंद कवर हो तथा जिसपर स्‍पष्‍ट रूप से भाग-। टेकनो कॉमरशीयल बीड, और भाग-।। प्राइस बीड लिखा गया हो, जमा करना होगा और सभी तीनों लिफाफों में निविदा संख्‍या एवं निविदा खुलने की नियत दर्शाना होगा।
3.2 टेकनो कॉमर्शियल बीड
) तकनीकी बोली : तकनीकी बोली में फर्म, तकनीकी संसाधनों, विभिन्‍न पार्टियों को एक ही प्रकार के आपूर्तित उपकरणों/सामग्री के विषय में उपलब्‍ध सूचना की पी ऐंड एम सूची, प्रमाण-पत्र तथा संतोषजनक कार्य निष्‍पादन एवं किसी अन्‍य संगत सूचना के पक्ष में दस्‍तावेजी साक्ष्‍य के पूर्ण विवरण शामिल होंगें।
उद्धरित मद का तकनीकी साहित्‍य, रेखाचित्र (ड्रार्इंग) आदि के साथ पूर्ण विवरण एवं विनिर्देशन, जहां डीजीएमएस के अनुमोदन की आवश्‍यकता है, वहां डीजीएमएस एवं आइएसआइ द्वारा जारी किए गए मान्‍य अनुज्ञप्ति की एक प्रति संलग्‍न करनी होगी। उन निर्माताओं की बोली विचारणीय होगी, जो यह साबित करेंगे कि समान प्रकार के कार्यों के लिए मुख्‍यालय के एमएम डिविजन द्वारा दिए गए नियमित आदेशों के बदले में उनके उत्‍पाद का बीसीसीएल में पहले भी संतोषजनक प्रदर्शन के साथ प्रयोग किया गया है अथवा उन्‍होंने इन समानों को सीआइएल के किसी अन्‍य इकाई अथवा  सरकारी/लोक (सरकारी) क्षेत्र के किसी अन्‍य उपक्रम में आपूर्ति किया है।  पुरजों की आपूर्ति के लिए वही निविदादाता तकनीकी तौर पर योग्‍य समझे जाएंगे जो:
i. ओइएम, उनके एकमात्र विक्रय एजेंट/प्रांतीय वितरक, अथवा
ii. एकमात्र बिक्री एजेंट अथवा निर्माता के वैसे वितरक जो बीसीसीएल को नियमित आदेशों/संविदा दर के बदले में इसी तरह के समानों की आपूर्ति करते है। अथवा
iii. निर्माता अथवा मूल बिक्री एजेंट अथवा निर्माता के वैसे वितरक जो ओइएम अथवा कोल इंडिया के किसी अनुषंगी इकाई अथवा सरकार के किसी अन्‍य लोक उपक्रम अथवा फर्म को इसी प्रकार के समानों के नियमित आपूर्तिकर्ता हैं।
निविदादाता को नियमित आपूर्तिकर्ता होने के साक्ष्‍य के रूप में उद्धरित/मिलते-जुलते समानों के आपूर्ति आदेश की प्रमाणित प्रतियां अथवा कार्य-प्रदर्शन प्रतिवेदन यदि हो तो प्रस्‍तुत करना होगा। सीआइएल अथवा उसकी अनुषंगी कंपनियों के आदेश की प्रतियों के मामले में दर एवं मात्रा मिटाया नहीं जाना चाहिए।
) वाणिज्यिक बोली :
i. इसमें मालीकाना स्थिति में होना चाहिए, जैसे कंपनी, भागीदार, सरकारी उपक्रम आदि शामिल होनी चाहिए।
ii. वित्‍तीय आंकडे:- वर्तमान आयकर समाशोधन प्रमाण-पत्र, मान्‍य बिक्रीकर समाशोधन प्रमाण-पत्र, सरकारी/अर्ध-सरकारी संस्‍थानों आदि में पंजीकरण/सूचीबद्धता का विवरण (डीजीएस ऐंड डी/एमएसआइसी/एसएसआइ/सीआइएल अथवा अन्‍य लोक उपक्रम आदि) प्रस्‍तुत करना होगा।

सभी प्रमाण-पत्रों एवं उपर्युक्‍त सूचनाओं को मुहर के साथ विधिवत प्रमाणित कर प्रस्‍तुत करें। निविदा के सभी दस्‍तावेजों के कागजात पर अनिवार्य रूप से क्रमवार क्रम संख्‍या लिखी जाय।
iii. भुगतान की शर्तें:
भुतगान की निम्‍नलिखित शर्तें इस निविदा के लिए लागू होंगी। निविदाताओं से आग्रह किया जाता है कि वे अपनी निविदा में कोई अतिरिक्‍त शर्त शामिल न करें और वे भुगतान की शर्तों के रूप में इसे उद्धरित करेंगे, जो निम्‍नलिखित हैं:
क.  कार्यस्‍थल पर परेषिती द्वारा कार्यस्‍थल पर माल के स्‍वीकरण एवं प्राप्ति अथवा विपत्र प्रप्ति, इनमें से जो भी बाद में हो के 30 दिनों के भीतर भुगतान प्राधिकारी द्वारा 100% भुगतान कर दिया जाऐगा।
iv. सुपुर्दगी अवधि:
कंपनी स्‍पष्‍ट शब्‍दों में प्रस्‍तावित आरंभ तिथि एवं प्रति माह/प्रति तिमाही सुपुर्दगी दर को दर्शाते हुए सुपुर्दगी की समय-सारिणी को दर्शए। कार्य समापन को भी स्‍पष्‍ट शब्‍दों में उल्‍लेखित किया जाना चाहिए।
v. परिनिर्धारित नुकसान : सामान्‍य नियम एवं शर्तो के अनुसार
vi. मूल्‍य परिवर्तन : संविदा के कार्यान्‍वयन के दौरान वृद्धि नहीं करने की शर्त के साथ, मूल्‍य की बोली में उद्धरित दर ”फर्म” के आधार पर होनी चाहिए।
vii. गारंटी/वारंटी: आपूर्ति की तारिख से 18 माह तक अथवा उपकरण के आरंभ करने की तारिख से 12 माह तक, इनमें से जो भी पहले हो।
viii. कार्य प्रदर्शन गारंटी : उपकरणों के मामले में अथवा जहां विनिर्दिष्‍ट हो और निविदा स्‍वीकरण के अवसर पर, निविदादाता को वारंटी अवधि के लिए कार्यादेश के मूल्‍य के 10% के बराबर बैंक गारंटी देना होगा।
ix. प्रतिभूति जमा: सफल निविदादाताओं को कार्यादेश निर्गमन के पहले कार्यादेश के मूल्‍य का 5% अथवा रु. 10,000/-, इनमें से जो भी कम हो, को नगद/बैंक गारंटी/एनएससी के रूप में जमा करना होगा। जो फर्म डीजीएस ऐंड डी/ एनएसआइसी/बीसीसीएल में पंजीकृत हैं उन्‍हें इसकी छूट होगी। निर्धारित अवधि के भीतर प्रतिभूति जमा करने में असफल होने की स्थिति में बीसीसीएल को दोषी आपूर्तिकर्ता के खर्चे एवं जोखिम पर आपूर्ति के लिए वैकल्पिक व्‍यवस्‍था करने का अधिकार होगा।
x. र्वधता : निविदाओं की वैधता निविदा खुलने की तिथि से 180 दिनों तक रहेगी।
भाग – II मूल्‍य बोली (प्राइस बिड), अलग मुहरबंद लिफाफे में
ii. यहां यथा निर्देशित ब्‍यौरे ब्रेक अप के साथ एफओआर गंतव्‍य के आधार पर दरें इसमें शामिल होंगी।
iii. मूल्‍य: जबतक कि अन्‍यथा इस दस्‍तावेज में विनिर्दिष्‍ट न हो, दरें मदवार उद्धरित होनी चाहिए। कीमत अनिवार्य रूप से स्‍थावर मूल्‍य के आधार पर उद्धरित हो। आपके द्वारा मांगी गई कीमत अनिवार्य रूप से निम्‍नलिखित विवरणों के साथ परिशिष्‍ट ‘क’ (मदों की अनुसूची) के अनुसार दर्शाया जाय:-
क. कारखाने के बाहर आधार दर।
ख. पैकिंग एवं फारवडिंग शुल्‍क, यदि कोई हो तो।
ग. उत्‍पाद शुल्‍क �प्रेषित माल एवं बिल के साथ उत्‍पाद शुल्‍क के भुगतान का साक्ष्‍य प्रस्‍तुत किया जाय। स्‍थावर मूल्‍य में उत्‍पाद शुल्‍क(इडी) शामिल होने के मामले में, उल्‍पाद शुल्‍क की दर भी अनिवार्य रूप से दर्शाया जाय।
घ. बिक्री कर।
च. कोई अन्‍य कर/शुल्‍क (विवरण दें)।
छ. सड़क परिवहन शुल्‍क (अधिकतम) : कारखाने के बाहर के आधार पर मूल्‍य उद्धरित करने के मामले में, कार्यस्‍थल तक का सड़क परिवहन शुल्‍क अनिवार्य रूप से उद्धरित किया जाय। माल भाड़े की प्रतिपूर्ति ट्रांसपोर्टर का बिल प्रस्‍तुत करने पर ही किया जाएगा।
ज. अंतिम स्‍थावर मूल्‍य।
झ. मूल्‍य के अतिरिक्‍त, तकनीकी-वाणिज्यिक बोली (भाग-।) के साथ संपूर्ण भाग-।।
(मूल्‍य बोली) के जैसा एक सादा भाग-।। प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किया जाना चाहिए।

iv. जो निविदादाता स्‍थावर लागत आधार के अलावे बोली लगाता है, उसका मूल्‍य कंपनी में प्रचलित प्रावधान के आधार पर व्‍यावहारिक भार के अनुसार तय किया जाएगा।
4. बीसीसीएल, निविदा प्रस्‍तुत करने की अंतिम तिथि के पहले, कभी भी एक संशोधन जारी कर निविदा दस्‍तावेज में परिवर्तन कर सकता है और निविदा प्राप्‍त करने एवं तदनुसार निविदा खुलने की तिथि में बढ़ा सकता है।
5. निविदा साफ-सुथरी टाईप होनी चाहिए। हाथ से लिखि हुई कोई भी निविदा स्‍वीकार नहीं की जाएगी। जहां कहीं भी सुधार करना अपरिहार्य होगा, उसे काटकर तथा पुन: लिख कर सुधार किया जाएगा तथा इसे निविदादाताओं के पूर्ण हस्‍ताक्षर एवं तारिख के साथ्‍ प्रमाणित किया जाएगा।
6. निविदादाता दरों को नियंत्रित करने वालों उन सभी विनिर्देशनों एवं शर्तों का पालन करेंगे, जिसके लिए उन्‍होंने निविदा प्रस्‍तुत की है।

7. कोई भी वैकल्पिक प्रस्‍ताव को मुख्‍य प्रस्‍ताव से अलग दिखाया जाएगा तथा मूल्‍य बोली को एक मुहरबंद लिफाफे में अलग से संलग्‍न किया जाएगा, जिसपर वैकल्पिक प्रस्‍ताव के लिए मूल्‍य बोली लिखा रहेगा।
8.सूची, नियमावली: आपूर्ति किए जाने वाले प्रत्‍येक उपकरण के लिए पूर्जों की सूची, परिचालन एवं रखरखाव नियमावली की दो प्रतियां, परेषिति को प्रस्‍तुत की जाएगी। पूर्जों की सूची की एक प्रति इस कार्यालय को प्रस्‍तुत की जाएगी।
9. बिक्री उपरांत सेवा:
सफल निविदादाता को निम्‍नलिखित सेवाएं देनी होगी:
i) उपकरणों के प्रत्‍येक खेप के साथ एक कार्ड/टैग लगा हो, जिसमें उपकरण का पूर्ण व्‍यौरा, आपूर्तिकर्ता का नाम एवं पता दिया गया हो, ताकि उपकरण के प्रतिष्‍ठापन एवं चालू करते समय आपूर्तिकर्ता को सूचित किया जा सके।
ii) आपूर्तिकर्ता द्वारा एक वर्ष में कम से कम दो बार मुफ्त निरीक्षण करना होगा और इसका प्रतिवेदन बीसीसीएल तथा संबंधित क्षेत्र के संबेधित तकनीकी प्रमुख के समक्ष प्रस्‍तुत करना होगा।
iii) संबंधित तकनीकी प्रमुख द्वारा प्रतिवर्ष एक बार उपकरण के प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी।  समीक्षा के दौरान फर्म के प्रतिनिधि को उपस्थित होने के लिए बुलाया जाएगा।
10. मूल्‍य ह्रास का कारण:
i) विक्रेता द्वारा क्रय आदेश/संविदा के तहत आपूर्ति किये जाने वाले सामानों/उपकरणों के लिए मांगी गई कीमत को किसी भी स्थिति में उसकी न्‍यूनतम कीमत को नहीं बढ़ाएगा, जिसपर उसने सामान/उपकरण को बेचा है अथवा क्रय आदेश/संविदा अवधि के दौरान इससे मिलते-जुलते किसी सामान/उपकरण को बेचने के लिए किसी अन्‍य उपभोक्‍ता को प्रस्‍ताव नहीं दे सकता है।
ii) अगर आपूर्तिकर्ता/विक्रेता इस कथित अवधि के दौरान किसी भी समय बिक्री मूल्‍य को कम करता है, क्रय आदेश/संविदा के तहत मांगी गई कीमत से कम पर किसी अन्‍य उपभोक्‍ता को उक्‍त सामानों/उपकराणों को बेचता है अथवा बेचने का प्रस्‍ताव देता है तो उसे उक्‍त कटौती या बिक्री के प्रस्‍ताव की सूचना हमें तत्‍काल देनी होगी ताकि हम अपने आदेश-दर में संशोधन कर सकें और अगर उन्‍होंने अधिक रकम प्राप्‍त कर लिया है तो उन्‍हें उसे वापस करना होगा।
11. क्रय की प्राथमिकता: सरकार/कंपनी के निदेशानुसार सरकारी विभाग/लोक उपक्रम क्षेत्र एवं सहायक इकाइयों को क्रय करने के लिए प्राथमिकता दी जाएगी।
12. सौदा : वाणिज्यिक शर्तों पर सौदा। जैसे कारखाने से बाहर/एफओआर प्रेषण स्‍थल से एफओआर गंतव्‍य स्‍थल आदि तक अथवा निविदा मूल्‍य के खुलने से पहले स्‍पष्‍टीकरण चाहना, सौदे की शर्त नहीं मानी जाएगी।
अगर मूल्‍य पर सौदेबाजी की आवश्‍यकता होगी तो इसे सीवीसी के नियमानुसार किया जाएगा।
13. निरीक्षण :
बीसीसीएल को सामानों/उपकरणों का निरीक्षण अपने प्रतिनिधि अथवा किसी अन्‍य व्‍यक्ति द्वारा कराने का अधिकार होगा। सामान/उपकरण, विशिष्टिकरण के अनुकूल तबतक हो जबतक क्रय आदेश/संविदा में किसी प्रकार का परिवर्तन एवं विनिर्देशन अथवा इसमें कोइ संशोधन नहीं किया जाता है।
क) जांच एवं परीक्षण के लिए सुविधाएं।
ख) जांच की लागत
ग) जांच के लिए सामानों/उपकरणों की सुपुर्दगी।
घ) प्रयोगशाला-जांच की लागत हेतु दायित्‍व।
ड.) जांच का तरीका।
च) जांच में लगाए गए सामान ।
14. i) निर्माताओं के ट्रेड मार्क आदि को तकनीकी वाणिज्यिक प्रस्‍ताव (टेक्‍नो कार्मसियल ऑफर) में अनिवार्य रूप से दर्शाया जाय।
ii) प्रत्‍येक उपकरणों पर निर्माताओं के ट्रेड मार्क का छाप/चिह्न अवश्‍य दिया जाय। सफल विक्रेता को सभी उपकरणों के उपयुक्‍त स्‍थान पर ”बीसीसीएल” का छाप भी देना होगा।
15. फर्म के वैसे प्रविनिधि जो निविदा के खुलने के अवसर में उपस्थित रहना चा‍हते हैं, उन्‍हें इसके लिए अपने प्रबंधन से उचित अधिकार-पत्र लाना चाहिए।
16. उपर्युक्‍त किसी भी शर्त में चूक/निष्‍ठा न रखने पर प्रस्‍ताव को अस्‍वीकृत किया जा सकता है।
17. बिना कारण बताए, बीसीसीएल को किसी निविदा, स्‍वीकार अथवा अस्‍वीकार करने का अधिकार है।
18. सामान्‍य नियम एवं शर्तों में हुए किसी परिवर्तन का स्‍थान विशेष नियम एवं शर्तें ले लेगी।
एनआइटी से उत्‍पन्‍न संविदा का मामला केवल धनबाद न्‍यायालय के अधिकार क्षेत्र में होगा।
महाप्रबंधक (एम एम) की ओर से

टिप्‍पणी: सभी आवश्‍यक शर्तों का उत्‍तर देना अनिवार्य होगा, किसी भी कॉलम को खाली या अनुत्‍तरित न छोड़े। प्रस्‍ताव को अस्‍वीकार होने से रोकने के लिए, तकनीकी वाणिज्यिक  (टेक्‍नो कार्मसियल) मानकों को एनआइटी विनिर्देशन की मांग के अनुसार ठीक-ठीक भरा जाना चाहिए।
संलग्‍न: (1) विशेष तकनीकी विवरण एवं विशेष वाणिज्यिक शर्त परिशिष्‍ट- “क”
(2) सामान्‍य नियम एवं शर्तें � परिशिष्‍ट –ख
परिशिष्‍ट
सामानों की आपूर्ति के सामान्‍य नियम एवं शर्तें
1. परिभाषा

संविदा तथा इसको नियंत्रित करने वाली सामान्‍य एवं विशेष शर्तों की व्‍याख्‍या में, जबतक कि अन्‍यथा आवश्‍यक न हो
i. संविदा का अर्थ निविदा का आमंत्रण, निविदादाताओं को निर्देश, निविदा के विवरण की स्‍वीकृति और निविदा स्‍वीकृति में विनिर्दिष्‍ट विशेष शर्ते जिसमें पुनरावृत्ति आदेश शामिल है, जिसे संवेदक द्वारा स्‍वीकार करके अनुकरण किया गया है।
ii. ”आपूर्तिकता” शब्‍द का अर्थ होगा, वह व्‍यक्ति, फर्म, अथवा कंपनी, जिसके साथ करार हुआ है और इसमें आपूर्तिकर्ता के उत्‍तराधिकारियों (क्रेता द्वारा अनुमोदित), प्रतिनिधियों, वारिशों, निष्‍पादकों, प्रशासकों तथा जिसे इसके लिए नामित किया गया हो (जैसा भी मामला हो) को भी शामिल समझा जाएगा।

iii. संविदा मूल्‍य का अर्थ होगा स्‍वीकृत राशि अथवा मूल्‍य के अनुसार परिकलित राशि तथा क्रेता अथवा उसकी तरफ से स्‍वीकृत शर्तें।

iii. अगर उपर्युक्‍त उप खंड (ii)  के अनुसार संविदा का निर्धारण नहीं किया जाता है, तो  भागीदार के फर्म से अलग होने पर भी संविदा के तहत वह फर्म के कार्यों के लिए तबतक जिम्‍मेवार बना रहेगा जबतक पार्टनरशीप अधिनियम की धारा 32 के तहत उसके द्वारा इससे संबंधित सार्वजनिक सूचना की एक प्रति पावती युक्‍त पंजीकृत डाक से क्रेता को नहीं भेज दी जाती है।
b.
ग. उल्‍लंघन का परिणाम: आपूर्तिकर्ता अथवा आपूर्तिकर्ता-फर्म के किसी भागीदार द्वारा इस उपधारा की शर्त (क) अथवा (ख) (।) का उल्‍लंघन किया जाय तो क्रेता के लिए संविदा को निरस्‍त करना और आपूर्तिकर्ता के जोखिम एवं लागत पर सामानों के क्रय अथवा क्रय के लिए अधिकृत करना विधि सम्‍मत होगा और उस मामले में धारा 20 के प्रावधानों को जहां तक लागू हो, वहां लागू किया जाएगा।
घ.  कोई भी मामला अथवा इस उप-धारा के संबंध में उठाई जानी वाली बात अथवा किसी भी मामले पर चाहे आपूर्तिकर्ता या आपूर्ति करने वाले फर्म के किसी भागीदार ने इस उप-धारा की किसी शर्त का उल्‍लंघन किया है, तो ऐसे में बीसीसीएल द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम तथा आपूर्तिकता के लिए बाध्‍यकर होगा।
10. सरकार के सहायोग से कच्‍चे माल का प्रयोग सुनिश्चित करना
क. अगर संविदा के निष्पादन के लिए, कोल इंडिया लिमिटेड की सहायता से क्रय या किए गए करार के तहत या परमिट, अनुज्ञप्ति, कोटा प्रमाण-पत्र या निर्गमित द्वारा या प्राधिकार के द्वारा अथवा इसके तहत अथवा इसकी ओर से या कानून द्वारा इसके लिए अधिकार प्रदत्‍त किसी अधिकारी द्वारा या सरकारी स्‍टॉक से जारी किए जाने के प्रभाव से प्राप्‍त कच्‍चा माल और जहां आपूर्तिकर्ता को उक्‍त कच्‍चे माल के खरीद हेतु उसे संविदा के विस्‍तार के लिए, समर्थ बनाने हेतु समर्थित करने के लिए अग्रीम भुगतान किया गया हो, तो आपूर्तिकर्ता

i. कोल इंडिया की ओर से उक्‍त सामानों के लिए न्‍यासी (ट्रस्‍टी) के रूप में कार्य करेगा।
ii. उक्‍त सामग्री का इस्‍तेमाल मितव्‍ययी रूप से एवं केवल संविदा के उद्देश्‍य के लिए करेगा।
iii. क्रेता के पूर्व लिखित अनुमति के बिना इसे नहीं बेचेगा।
iv. इस प्रकार की सामग्री का यथोचित लेखा प्रस्‍तुत करेगा और इसके सभी शेष अथवा संविदा के समापन अथवा किसी भी कारण से इसके निरस्‍तीकरण के उपरांत, बचे हुए अनुपयोगी सामग्रियों को क्रेता को उसके बताए गए स्‍थान पर वापस करेगा।
ऐसी सामग्री को वापस करने पर आपूर्तिकर्ता उसी मूल्‍य के लिए हकदार होगा जिसे क्रेता ऐसी सामग्री की स्थिति को ध्‍यान में रखकर निर्धारित करेगा।
(ख) जहां आपूर्तिकर्ता की तरफ से हुई किसी चूक होने के कारण संविदा को निरस्‍त कर दिया गया है। वहां किसी भी सामग्री को बीसीसीएल द्वारा अंतिम रूप से निर्धारित गंतव्‍य स्‍थान तक वापस करने में, हुए खर्च अथवा परिवहन शुल्‍क का भुगतान आपूर्तिकर्ता को करना होगा।
11. महत्‍वपूर्ण सामानों के मामले में, आपूर्तिकार्ता को आपूर्ति आदेश प्राप्‍त करते समय अपने कोटेशन में स्‍पष्‍ट रूप से यह उल्‍लेख करेंगे कि वे सभी आवश्‍यक रख-रखाव के औजार तथा कल-पूर्जे, जिसकी आवश्‍यकता मशिनों के सामान्‍य कार्यकाल में समय-समय पर पड़ सकती है, की सतत आपूर्ति निर्धारित अवधि के भीतर अपने परिसर में प्रारंभिक प्रतिशत अंतर सहित (इस प्रकार के प्रतिशत अंतर दर्शाए जाएं) लैंडेड कास्‍ट से कम मूल्‍य पर करते रहेंगे तथा अगर आपूर्ति डीजीएस ऐंड डी सहित दर-संविदा है तो उस मामले में जब भी आवश्‍यकता हो उनके द्वारा आपूर्तित मुख्‍य यूनिट की जाएगी।

12. निविदादाताओं को प्रस्‍तावित इकाई के संतोषजनक प्रदर्शन की वारंटी देनी होगी, यह वारंटी बीसीसीएल द्वारा सामानों को स्‍वीकृत करने के बाद 18 महीने अथवा प्रारंभ-तिथि के बाद 12 महिनों, इनमें से जो भी पहले हो, तक की होगी। आपूर्तिकर्ता वैसे किसी खराबी के लिए जबाबदेह होगा जो इस संविदा द्वारा दिए गए प्रावधानों तथा उचित प्रयोग,सामानोंकेगलतडिजाइनयाकार्यशालाकीत्रुटिकेकारणहुईहो।आपूर्तिकर्ताकोइसेठीककरनेकेलिएबुलाएजानेपरउक्‍तखराबियोंकोअपनेखर्चेपरठीककरनाहोगा।आवश्‍यकतापड़नेपरअगरआपूर्तिकर्ताद्वारासामानोंकेखराबहिस्‍सेकोबदलाजाताहैअथवाउसेनयालगायाजाताहैतोआपूर्तिकतायहकामबीसीसीएलसेबिनाकोईअतिरिक्‍तखर्चलिएकरेगा।

ट. निरीक्षण के परीणाम की अधिसूचना

जबतक कि विनिर्देश अथवा अनुसूची में अन्‍यथा शर्त लगाई नहीं गई हो, सामानों को निरीक्षण के  लिए प्रस्‍तुत करने के बाद, इसकी जांच यथा व्‍यवहार्य शीघ्र कर ली जाएगी और इस निरीक्षण के परीणाम की सूचना आपूर्तिकता को दे दी जाएगी।
ठ. समानों को चिह्रित (मार्किंग) करना
आवश्‍यकता होने पर, आपूर्तिकर्ता को अपने खर्चे पर सरकार अथवा विक्रेता के चिह्रन (मार्क) को अनुमोदित सभी सामानों पर लगाएगा अथवा निरीक्षक को इसे लगाने की अनुमति देगा। निरीक्षक द्वारा आवश्‍यक समझे जाने पर, जो सामान मार्क किया हुआ नहीं होगा उन प्रत्‍येक समानों पर उक्‍त मार्क लगाकर तथा सील करके उचित प्रकार के पैक अथवा डब्‍बे में बंद कर दिया जाय।
ड. निरस्‍त सामानों को हटाना
(क) आपूर्तिकर्ता के परिसर से अलग किसी स्‍थान पर अगर कोई सामान निरीक्षण के लिए दिया जाता है तो उक्‍त अस्‍वीकृत सामग्री की सूचना मिलने के चौदह दिनों के भीतर आपूर्तिकता को अस्‍वीकृत सामानों को हटाना होगा। अगर यह साबित हो जाता है कि इस सूचना का पत्र उसे अनुसूची में दर्ज पते पर भेजा गया है, जब यह पत्र साधारण डाक के माध्‍यम से भेजा गया हो तो यह समझा जाएगा कि यह आपूर्तिकर्ता को समय पर मिल गया है, उस स्थिति में  निरीक्षक को यह अधिकार होगा कि वह आपूर्तिकता को बुला कर, खतरनाक, संक्रमित, नुकसानदेह समझे जाने वाले उन सामानों को इस प्रकार की सूचना प्राप्ति के 48 घंटे के अंतर हटाने के लिए कहे।
(ख) उक्‍त अस्‍वीकृत सामानों को अस्‍वीकार करते समय सभी तरह की जोखिम की परिस्थितियों के लिए आपूर्तिकर्ता की जिम्‍मेवारी होगी और अगर उक्‍त सामानो को उपर्युक्‍त समय के भीतर आपूर्तिकर्ता द्वारा नहीं हटाया गया, तो निरीक्षक/क्रेता इन सामानों को आपूर्तिकर्ता को उसके जोखिम एवं लागत पर तथा पब्लिक टैरिफ दर पर, क्रेता अथवा निरीक्षण द्वारा तय किए गए परिवहन के माध्‍यम से वापस भेज सकते हैं अथवा उक्‍त सामानों को आपूर्तिकर्ता के जोखिम एवं खर्चें पर निपटान कर सकते हैं और आवश्‍यकता होने पर इस निपटान से होने वाली आमदनी को निपटान के खर्चें के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है। क्रेता को अस्‍वीकृत सामानों को न हटाए जाने वाली अवधि के लिए रखरखाव एवं भंडार शुल्‍क वसूल करने का भी  अधिकार होगा ।
ढ़. निरीक्षण टिप्‍पणी
निरीक्षण द्वारा सामानों को स्‍वीकारने योग्‍य पाए जाने पर, वह आपूर्तिकर्ता को इसके विपत्र के लिए सभी आवश्‍यक दस्‍तावेजों को संलग्‍न करके, निरीक्षण के प्रतियों के साथ विधिवत पूरा करके भेजेगा।

17.
() पैकिंग एवं परिवहन
सफल निविदादाता की जिम्‍मेवारी होगी कि वह सामानों को पर्याप्‍त मात्रा में तथा उचित प्रकार से पैक करके, रेल, सड़क अथवा समुद्र मार्ग से, जैसा आवश्‍यक हो, के माध्‍यम से गंतव्‍य तक नुकसान अथवा क्षति रहित परिवहन के लिए प्रबंध करे। सामानों के पैकिंग का वहन सफल निविदादाता के द्वारा किया जाए्रगा।
(ख) प्रेषित माल का पूर्ण विवरण की स्‍पष्‍ट रसीद परिवहन प्राधिकार से प्राप्‍त करना सफल निविदादाता की जिम्‍मेवारी है। वह कोई भी खेप ”सैड टू कॉनटेन” के आधार पर नहीं भेजेगा। अगर वह ऐसा करता है तो वह उसकी जिम्‍मेवारी होगी। संविदा के अनुसार बीसीसीएल केवल उन्‍हीं सामानों का भुगतान करेगा जो उसके द्वारा वास्‍तविक रूप से प्राप्‍त किया गया है।
(ग) पैकिंग के सभी डिब्‍बों, कंटेनरों, पैकिंगों तथा इससे मिलते-जुलते सामाग्री की आपूर्ति सफल निविदादाओं द्वारा निशुल्‍क की जाएगी और इसे वापस नहीं लौटाया जाएगा, जबतक कि अन्‍यथा इसका उल्‍लेख संविदा/आपूर्ति आदेश में नहीं किया गया हो।
18. सुपुर्दगी
”निविदा के स्‍वीकरण” में अनुबंधित, सामानों की सुपुर्दगी के लिए दिए गए समय एवं तारिख, संविदा की आवश्‍यक शर्त समझी जाएगी और इस विनिर्देशित तारिख तक सामानों की सुपुदर्गी का काम अवश्‍य पूरा कर लिया जाय।
19. नमूने के अनुसार तथा/अथवा आपूर्ति आदेश में विनिर्देशित अनुबंधित तारिख/अवधि के भीतर सामानों की सुपुर्दगी अथवा उसे भेजने में असफल होने की स्थिति में और बीसीसीएल के आपूर्ति आदेश में वर्णित नियम एवं शर्तों के उल्‍लंघन की स्थिति में:
क.  प्रत्‍येक महीने अभवा महीने के किसी भाग के दौरान इस प्रकार के सामानों की सुपुर्दगी, जिसका बकाया अधिकतम 5% सीमा के अंतर्गत रह सकती है, के लिए उपर्युक्‍त के अनुसार सफल निविदादाता आपूर्ति करने में असफल रहा हो तो यथा निर्धारित नुकसान जो किसी सामान की कीमत से 2% हो, की वसूली वैसे सफल निविदाता से करने का अधिकार होगा, अथवा
ख.  जो खेप आपूर्ति के लिए अभी तक बकाया नहीं है, उससे संबंधित सामानों के आपूर्ति आदेश को निरस्‍त किए बिना सामानों की आपूर्ति अथवा इससे मिलते-जुलते सामानो की आपूर्ति नहीं करने वाले दोषी आपूर्तिकर्ता के जोखिम और सफल निविदादाता की जिम्‍मेवारी तय करते हुए उसको सूचना देने के बाद खरीदने का अधिकार होगा, अथवा
ग. अगर दोषी आपूर्तिकर्ता के जोखिम एवं लागत पर सामानो की आवश्‍यकता हुई, तो आपूर्ति आदेश अथवा इसके किसी भाग को निरस्‍त करने का अधिकार होगा
घ. अगर उपरोक्‍त खंड (क) में उल्लिखित सहमत निर्धारित क्षति से अधिक जुर्माने नहीं लगाया गया हो तो बिना जुर्माने के अथवा जुर्माने के साथ सुपुदर्गी अवधि को बढ़ाने का अधिकार होगा।
ड़. प्रतिभूति जमा को पूरी तरह अथवा अंशत: जब्‍त करने का अधिकार होगा।
च. संविदा के तहत आपूर्तिकर्ता द्वारा किसी भुगतेय से भुगतान की जाने वाली वसूली योग्‍य कोई भी रकम होने पर, बीसीसीएल को सफल निविदादाता से उचित रकम अंशत: अथवा एकमूश्‍त  में वसूल करने का हकदार होगा एवं किसी भी समय अथवा अगर यह रकम संविदा वसूली योग्‍य पूरी रकम के लिए पर्याप्‍त नहीं होगी तो मांग करने पर सफल निविदाता कोल इंडिया लिमिटेड की शेष रकम का भुगतान अन्‍य संविदा से करेगा। आपूर्तिकर्ता को उक्‍त क्रय पर किसी प्रकार के लाभ का अधिकार नहीं होगा।
20. अगर युद्धस्थिति, इनकार्गो या नाकेबंदी या आगजनी, बाढ़, प्रा‍कृतिक आपदा अथवा अन्‍य आकस्मिकता जो आपूर्तिकर्ता के नियंत्रण से बाहर हो, के परिणामस्‍वरूप संविदा/आपूर्ति आदेश के कार्यान्‍वयन में अनुबंधित अवधि से देरी होता है तो कोल इंडिया परिस्थितियों को देखते हुए, सुपुदर्गी अवधि बढ़ाकर अतिरिक्‍त समय की अनुमति दे सकता है तथा उसका यह निर्णय अंतिम होगा। जबकभी भी अगर कोल इंडिया द्वारा अतिरिक्‍त समय की मंजूरी दी जाती है तो संविदा/आपूर्ति आदेश को इस तरह पढ़ा तथा समझा जाएगा मानो इसमें प्रारंभ के समय में सुपुदर्गी की बढ़ाई गई तिथि शामिल थी।
21.आपूर्तिकर्ता निरीक्षक, प्रोग्रेस आफिसर अथवा इस तरह के इसी उद्देश्‍य से नामित अन्‍य अधिकारी को, अपने कार्यस्‍थल एवं अभिलेखों तक पहुंचने के लिए निशुल्‍क समुचित सुविधाएं उपलब्‍ध कराएगा। उपर्युक्‍त (15) में उल्‍लेखित आपूर्ति आदेश के मुकाबले सफल निविदादाता द्वारा आपूर्ति किए गए सामानों का निरीक्षण डीजीएस ऐंड डी, नई दिल्‍ली (इसके सभी कार्यालयों सहित) के निरीक्षण दल के द्वारा अथवा आपूर्ति आदेश में विनिर्दिष्‍ट किसी अन्‍य एजेंसी द्वारा कराया जाएगा। जहां आवश्‍यक हो वहां आपूर्तिकर्ता के परिसर में भी निरीक्षण किया सकता है।
22. बीसीसीएल न्‍यूनतम दरवाली अथवा किसी निविदा को स्‍वीकार करने के लिए बाघ्‍य नहीं होगा तथा उसके पास संपूर्ण निविदा अथवा उसके किसी भाग को अथवा प्रस्‍तावित मात्रा के कुछ भाग को स्‍वीकार करने का अधिकार सुरक्षित होगा और निविदादाता को उद्धरित दर पर इसकी आपूर्ति करनी होगी।
23. पेटेंट, डिजाइन अथवा ट्रेडमार्क के पंजीकरण द्वारा संरक्षित किसी अधिकार के उल्‍लंघन के एवज में की गई आपूर्ति के संबंध में किये गए सभी दावों के विरूद्ध आपूर्तिकर्ता बीसीसीएल को सदैव क्षतिपूर्ति करेंगे वशर्ते कि पेटेंट पत्र, पंजीकृत डिजाइन अथवा ट्रेडमार्क, जिसे बीसीसीएल के विरूद्ध अभिकथित उल्‍लंघन के संबंध में किये गए किसी दावे की स्थिति में पार्श्‍व प्राधिकारी इसके आपूर्तिकर्ता को अधिसूचित करेंगे तथा आपूर्तिकर्ता उसके कारण हुए किसी विवाद अथवा चलाए गए, किसी मुकदमे को अपने खर्चे पर निपटान करने के लिए स्‍वतंत्र होगा।
24. आयातित समानों के लिए मालवाहक जहाज
मशिनों को विदेशों से आयातित करने के मामले में, यह अच्‍छा होगा कि जहां तक संभव हो सके लदाई भारतीय जहाज में ही करें। तथापि इस कारण से आपूर्ति में विलंब नहीं किया जाएगा।
25. मघ्‍यस्‍थता/पंच निर्णय
निर्माण, अथवा वर्तमान किसी शर्तो के प्रभाव एवं अनुप्रयोग अथवा इसके प्रावधानों अथवा  रकम अथवा इसके तहत किसी दायित्‍व के विस्‍तार अथवा संविदा से संबंधित किसी भी तरह का कोई भी विवाद अथवा पार्टियों के बीच मतभेद होने के मामले में, एक-दूसरे के परामर्श के बाद इसका निपटान दोनों पक्षों की सहमति से नियुक्‍त किए गए मध्‍यस्‍थ या मध्‍यस्‍थों द्वारा किया जाएगा और मध्‍यस्‍थता की कार्यवाही उस समय लागू भारतीय मध्‍यस्‍थ कानून के प्रावधानों के तहत किया जाएगा और मध्‍यस्‍थों द्वारा लिया गया निर्णय दोनों पक्षों को मान्‍य होगी। विदेशी आपूर्तिकताओं/निर्माताओं को दिए गए आदेश के मामलों में, मध्‍यस्‍थता इंटरनेशनल चेम्‍बर ऑफ कॉमर्स, जेनेवा द्वारा की जाएगी।
26. मालभाड़ा
समानों का प्रेषण पब्लिक ट्रैरिफ दर पर किया जाएगा। संविदा प्रेषण के एफओआर स्‍टेशन होने के मामले में, उपलब्‍ध होने पर सामानों को भरे हुए वैगन की दर से और जैसा कि मामला हो, प्रेषण के समय उपलब्‍ध अधिकतम  किफायती मार्ग से और अधिकतम किफायती दर पर  बुक किया जायेगा। ऐसा करने में असफल होने पर, क्रेता को होने वाले किसी भी परिहार्य खर्चे के लिए आपूर्तिकर्ता जिम्‍मेवार होगा।
जहां वैकल्पिक रास्‍ते बताने के लिए, भारत कोकिंग कोल लि. को कहा जाएगा तो वह सबसे किफायती रास्‍ता बताते हुए इसका प्रयोग करने के लिए संकेत देगा अथवा उस प्राधिकारी का नाम बतायेगा जिसकी सलाह इस मामले में जी जाएगी तथा उसका अनुकरण किया जाएगा। अगर इस तरह के किसी प्राधिकारी द्वारा कोई भी सलाह दिया जाता है तो इस मामले में उसका निर्णय अथवा परामर्श अंतिम होगा और आपूर्तिकर्ता को मान्‍य होगा।
27. पारित संपत्ति
अनुबंध की शर्तों में जिस तरह का मामला हो, सामानों के रूप में मौजूद संपत्ति को क्रेता के पास तबतक न भेजा जाय जबतक कि इन सामानों को परेषिती या अंतरिम परेषिती को नहीं सुपुर्द कर दिया जाता है।
28. संविदा से संबंधित कानून
क.  फिलहाल इस संविदा का अनुपालन भारत में लागू कानूनों के अनुसार किया जाएगा।
. संविदा के तहत सुपुदर्गी स्‍थल, कार्य-प्रदर्शन स्‍थल अथवा भुगतान स्‍थल पर ध्‍यान दिए बिना, संविदा उसी स्‍थान की समझी जाएगी जहां पर निविदा स्‍वीकार की गई है अथवा आपूर्ति आदेश जारी किया  गया है।
ग. न्‍यायालय का अधिकार क्षेत्र
जहां से स्‍वीकृति के लिए निविदा निर्गत की गई है, वही स्‍थान संविदा के संबंध में अथवा इसके कारण उठे किसी भी प्रकार के विवाद के निर्णय के लिए न्‍यायालय का क्षेत्राधिकार होगा।
घ. सामानों का अंकल (मार्किंग)
सामानों की मार्किंग अनिवार्य रूप से आवश्‍यकता के अनुरूप उस व्‍यापारिक चिह्न से संबंधित हो, जो इस समय भारत में प्रभावी हो।
29. भ्रष्‍ट आचरण
आपूतिकर्ता, क्रेता के यहां नियोजित अथवा बीसीसीएल के आदेश के तहत काम करने वाले  किसी व्‍यक्ति अथवा इससे संबंधिक किसी भी वयक्ति को इस संविदा अथवा क्रेता से किसी अन्‍य संविदा को पाने अथवा अपने पक्ष में निष्‍पादित करने अथवा किसी काम को करने अथवा रोकने के लिए कोर्इ उपहार अथवा कोई प्रलोभन, पुरस्‍कार नहीं देगा अथवा ना ही देने का वादा करेगा। आपूर्तिकर्ता अथवा उसके यहां नियोजित अथवा उसकी ओर से कार्य कर रहे किसी व्‍यक्ति के द्वारा (चाहे आपूर्तिकर्ता की जानकारी में हो अथवा न हो) किया गया उपर्युक्‍त शर्त का कोई भी उल्‍लंघन, भारतीय दंड संहिता, 1860 के चैप्‍टर IX  अथवा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1947 और लोक सेवक द्वारा भ्रष्‍टाचार से संबंधित किसी संशोधित अध्‍यादेश के लिए पारित इसके किसी संशोधन के तहत आएगा, तो बीसीसीएल को यह अधिकार होगा कि वह आपूर्तिकर्ता को दिये गए संविदा को निरस्‍त कर दे और खंड 20 में दिए गए प्रावधान के अनुसार उक्‍त निरस्‍तीकरण से हुए किसी नुकसान की रकम को आपूर्तिकर्ता से वसूल करे।
व्‍याख्‍या के प्रभाव अथवा उपरोक्‍त शर्तों के अनुप्रयोग अथवा क्रेता द्वारा आपूर्तिकर्ता से वसूली के लिए प्रस्‍तुत की गई रकम से संबंधित कोई भी विवाद अथवा मतभेद होने पर इसका निर्णय बीसीसीएल द्वारा लिया जाएगा तथा इस संबंध में लिया गया उसका निर्णय अंतिम होगा तथा आपूर्तिकर्ता को मान्‍य होगा।
30. दिवालियापन एवं संविदा का उल्‍लंघन
बीसीसीएल किसी भी समय लिखित सूचना देकर, आपूर्तिकर्ता को बिना क्षतिपूर्ति दिए, निम्‍नलिखित किसी बिंदुओं के आधार पर संविदा को तुरंत समाप्‍त कर सकता है:
क) अगर आपूर्तिकर्ता कोर्इ एक व्‍यक्ति अथवा किसी फर्म का कोई भागीदार होगा और उसे किसी भी समय दिवालिया घोषित होने पर अथवा उसे उसकी जायदाद से बेदखली का आदेश अथवा प्रबंध का आदेश प्राप्‍त होगा अथवा उस समय प्रभावी किसी दिवालियापन कानून के तहत संयोजन की कोई कार्यवाही करेगा अथवा कोई संपत्ति हस्‍तांतरण करेगा अथवा करने का प्रयास करेगा अथवा अपने लेनदारों के साथ संयोजन की कोई प्रविष्टि करेगा अथवा भुगतान स्‍थगित करेगा अथवा साझेदारी कानून के त‍हत फर्म का विलय होने की दशा में।
ख) अगर आपूर्तिकर्ता एक कंपनी है और न्‍यायालय अथवा रिसीवर के आदेश अथवा डिबेंचर-होल्‍डर की ओर से नियुक्‍त किए गए समापक प्रबंधक के आदेश पर स्‍वेच्‍छा से अपने व्‍यवसाय को समाप्‍त करता है अथवा ऐसी परिस्थितियां उत्‍पन्‍न होने पर, जिसमें डिबेंचर-होल्‍डर के न्‍यायालय को  रिसीवर, समापक अथवा प्रबंधक नियुक्‍त करने का अधिकार होगा।
ग) यदि आपूर्तिकर्ता किसी संविदा का उल्‍लंघन करता है जो विशेषतौर पर इसमें उपबंधित नहीं है, बशर्ते कि हमेंशा इस प्रकार का निश्‍चय किसी अधिकार अथवा कार्रवाई अथवा निराकरण के पूर्वाग्रह से नहीं किया जाएगा जो उसके बाद क्रेता को प्राप्‍त हो चुका होगा या होगा तथा बशर्ते यह भी कि आपूर्तिकर्ता क्रेता किसी अतिरिक्‍त खर्च के वहन के लिए जिम्‍मेवार होगा तथा आपूर्तिकर्ता किसी भी परिस्थिति में पुनर्क्रय पर किसी लाभ का हकदार नहीं होगा।
31. भुगतान की शर्ते

जब तक कि पार्टियों में अन्‍यथा करार न हो, सामानों की सुपुदर्गी का भुगतान विपत्रों के प्रस्‍तुत करने पर, लेखा नियंत्रक द्वारा चेक के माध्‍यम से भारतीय स्‍टेट बैंक/राष्‍ट्रीयकृत बैंक में किया जाएगा:
आपूर्तिकर्ता द्वारा आपूर्तित सामानों अथवा इसके प्रत्‍येक खेप का भुगतान, संविदा में विनिर्देशित नियम एवं शतों के आलोक में निम्‍नलिखित विधि के अनुसार विपत्रों के प्रस्‍तुत करने पर किया जाएगा।
क)  साधारण सामानों एवं अतिरिक्‍त पूरजों का 100%  भुगतान कार्यस्‍थल पर खेप के प्राप्‍त होने तथा परेषिति द्वारा इसे स्‍वीकार करने पर कर दिया जाएगा। रेलवे रसीद, लदान का बिल अथवा खेप की रसीद, जिसमें क्रमश: रेल, जहाज अथवा हवाई जहाज द्वारा प्रेषित किए गए सामानों का शुल्‍क दर्ज हो, की संख्‍या एवं तारीख, और उक्‍त रेलवे-लदान के बिल अथवा खेप की रसीद के साथ परेषिति को भेजे गए पत्र की संख्‍या एवं तारीख बिल पर लिखें। डाक से भेजे गए सामानों के मामले में, डाक की मूल रसीद बिल के साथ संलग्‍न की जाएगी तथा इसकी संख्‍या एवं तारीख इसमें लिखी होनी चाहिए।
ख) उस संयंत्र एवं उपकरण के लिए, जहां इनकी प्राप्ति के तुरंद बाद प्रतिष्‍ठापन संपन्‍न किया जा सकता है, वहं 95% / 98% भुगतान प्रेषण एवं निरीक्षण प्रमाण-प्रत्र के बदले में कर दिया जाएगा तथा शेष 5% / 2% का भुगतान कार्यस्‍थल पर सामग्री के प्राप्ति के 45 दिनों की भीतर कर दिया जाएगा, बशतें कि आपूर्ति आपूर्ति-आदेश के अनुसार इसकी की गई हो।
ग) उस संयंत्र एवं उपकरण के लिए, जहां उपकरण के प्राप्ति के तुरंद बाद प्रतिष्‍ठापन नहीं किया जा सकता है, वहां 90% भुगतान प्रेषण एवं निरीक्षण प्रमाण-प्रत्र के साक्ष्‍य के आधार पर कर दिया जाएगा तथा शेष 10% का भुगतान अंतिम खेप के प्राप्ति के 180 दिनों की भीतर कर दिया जाएगा।
32. प्रगति रिपोर्ट
क) आपूर्तिकर्ता संविदा की प्रगति तथा/अथवा सामानों की आपूर्ति से संबंधित उक्‍त रिपोर्ट को आवश्‍यकता अनुसार समय-समय पर प्रस्‍तुत करेंगे।

ख) उक्‍त रिपोर्ट के प्रस्‍तुतिकरण, प्राप्ति एवं स्‍वीकरण से संविदा के तहत प्राप्‍त क्रेता के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, और ना ही इसका इस्‍तेमाल विबंधन के रूप में क्रेता के विरूद्ध केवल इसलिए किया जाएगा कि उसने उक्‍त रिपोर्ट में दर्ज किसी सूचना पर की गई अपनी आपत्ति से अवगत नहीं कराया है।